
जालौन: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस लोकतंत्र पारदर्शिता मानवाधिकार सार्वभौमिक महत्व की रक्षा के लिए याद किया जाता है- एड.चौधरी बृजेंद्र मयंक
रिपोर्ट-इमरान अली
स्थान-कोंच, जालौन
कोंच (जालौन ) 3 मई वर्ष 1991 की विंड हक घोषणा एक मुक्त स्वतंत्र और बहुलवादी प्रेस की विकास से संबंधित है यूनेस्को द्वारा वर्ष 1997 से प्रतिवर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रेस फ्रीडम पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर स्वतंत्रता के सार्वभौमिक महत्व लोकतंत्र पारदर्शिता मानवाधिकारों की रक्षा में पत्रकारिता की भूमिका की याद दिलाता है। यह बात विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित पुष्प गार्डन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एड चौधरी बृजेंद्र मयंक ने कहीं। उन्होंने कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर हम लोकतंत्र की मूलभूत स्तंभों में से एक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए स्वतंत्र और स्वतंत्र और विविधतापूर्ण पत्रकारिता आवश्यक है। हालाकि यह खतरे में है यहां तक कि कुछ यूरोपीय संघ देश में भी और इसके बिना लोकतंत्र काम नहीं कर सकता हालांकि भारत में प्रेस को विशेष महत्व दिया जाता है यही वजह है कि आज भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। भारत में एक स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस का प्रतीक है। विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित परंपरागत रूप से प्रकाशित अखबारों के प्रति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रेषित स्वतंत्रता कहा जाता है।
कलमकारो ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को विभिन्न संस्थानों जैसे सरकार या धार्मिक संगठन द्वारा हस्तक्षेप की अनुपस्थिति के रूप में नहीं समझा जाता है। बल्कि लेखकों को अपने कार्यों को अन्य लोगों द्वारा प्रसार प्रकाशित करने का अधिकार है। वही आयोजित कार्यक्रम में कलमकारों ने यह भी कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य मीडिया की जवाब देही न्याय समानता और मानवाधिकारों को उजागर करने की भूमिका को रेखांकित करना है। पत्रकारों ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जेम्स आगस्ट हिकी को भारतीय पत्रकारिता का जनक माना जाता है उन्होंने 1780 मे बंगाल गजट पहला समाचार पत्र कोलकाता से प्रकाशित किया था कोलकाता एडवरटाइजर के नाम से भी जाना जाता था। यानी भारत में समाचार पत्रों का इतिहास 232 वर्ष पुराना है। हिंदी भाषा का प्रथम समाचार पत्र उदंत मार्तंड था।वह मंगलवार को साप्ताहिक निकलता था। कुल मिलाकर विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस को कलमकारों ने मनाया। वही प्रेस की स्वतंत्रता पर हो रहे हम लोग पर चिंता व्यक्त की। कई साम्यवादी राष्ट्रों में प्रेस की स्वतंत्रता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां परिषद नहीं है वहां लोकतंत्र जिंदा रह ही नहीं सकता। जब-जब किसी देश में तानाशाही कमी हुई है सबसे पहले कलमकारों पर प्रतिबंध लगाया गया और समाचार पत्रों को बंद किया गया। इसलिए यह तो स्पष्ट है कि लोकतंत्र को जिंदा रखने में कायम रखने में प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम में अशफाक खान बल्लू गणेश प्रसाद बुधौलिया राजेंद्र यादव मंटू दुबे संजय गोस्वामी पवन तिवारी अली जावेद काजी सिराजुद्दीन पुष्पेंद्र द्विवेदी दीपक खरे राजकुमार दोहरे हरिओम बुधौलिया संदीप अग्रवाल शैलेंद्र पटेल जितेंद्र यादव जहांगीर मंसूरी संतोष निरंजन मनोज अहिरवार संतोष सोनी जितेंद्र सोनी प्रिया शरण नगाइच योगेश पटेल रामप्रताप शर्मा के के श्रीवास्तव मोहम्मद यूसुफ राजवीर सिंह अनूप चतुर्वेदी रवि कुमार अनिरुद्ध तिवारी जिमी अरुण दुबे मारुति नंदन मिश्रा देवेंद्र पाठक प्रदीप कुमार दीक्षित हरिश्चंद्र तिवारी लौना अमित रावत अवनीत गुर्जर आशीष अवस्थी शशांक अग्रवाल इमरान अली खलीफा निकेत सक्सेना हर्षित मयंक छोटू वसीम सिद्दीकी नरेंद्र पाल सिंह सुरेंद्र मयंक सहित सैकड़ो पत्रकार मौजूद रहे।







